कविता✍️*मधेस दूत
----बज्जिका दर्पण----
राम विश्वास कुशवाहा
हरिवन -३,सर्लाही।
मधेस दूत दैनिक, जन–जन के बोली,
साँच–साँच खबर, हम लइके ढोली।
गरिब, किसान, मजूर के साथी,
न्याय आ हक खातिर, जन–जन के बाती।
एसआर मिडिया, मधेस के आवाज,
पीर आ पीड़ा से, जगवल समाज।
राष्ट्र के दर्पन, साँच के छविआ,
बज्जिका बचावल, हम सब के भइआ।
जनता के पीरा, जनता के बात,
हम लिखि देब रोज, साँच के साथ।
अँधियार मं जलल, उजियार के दीप,
साँच आ साहस के, अद्भुत प्रीत।
संस्था के सलाम, जवन रोज जगाइ,
साँच आ न्याय के दीप जलाइ।
मधेस दूत खुलल, बनल अभिमान,
धन्यवाद संस्थाके, बार–बार प्रणाम।
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