नेपाल के सर्लाही जिल्ला के हरिवन गाम में एगो गरीब घर के लइका रहल ।बचपन में ओकरा बाबु गुजर गेल, आ माई अपन खून-पसीना बहाके ओकरा पोषले पालले रहल । जोन दिन लइका भूखल सोवत रहल, माई खुद भूखल रह के ओकरा मुँह में रोटी रखलन । एक दिन गाम के मेले में पंडितजी प्रवचन दे रहलन, “भगवान सब जगह हए, जे सेवा करे ओहि में भगवान बसल बा ।”
लइका पंडितजी से पूछलक, “पंडितजी, हम भगवान के देख सकी?” पंडितजी मुस्कुरा के कहलक, “हाँ, घर जा आ जे तोहर खातिर दिन-रात बिना थके सेवा करेला, उहे तोहर भगवान बा ।” लइका घर आइल त देखलक, माई चुल्हा पर रोटी सेंक रहल हए, पसीना माथा से टपकत रहल, बाकिर मुँह पर मुस्कान हए । ओहि बेर ओकरा बुझाइल -
“हमार माई से बड़ भगवान कोई नइ ।”
ओ दिन से ऊ रोज माई के गोड़ छु के प्रणाम करे लागल, आ मन में कहे लागल “भगवान मन्दिर में नइ, माई के आँचल में हए।”
राम विश्वास कुशवाहा
हरिवन -३,सर्लाही
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