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Wednesday, August 20, 2025

--- बज्जिका दर्पण--- बलरा लक्ष्मीपुरके इतिहास


मुकेश कुमार मिश्र
बलरा नगरपालिका,लक्ष्मीपुर-३
हाल मलंगवा न.पा-८



सर्लाही जिल्लाके दक्षिण पश्चिम सिमा पर बलरा हए । अभी बलरा नगरपालिकाके लक्ष्मीपुर वडा नं. ३ में पड़इअ । वि.सं. २०३६ साल से पहिले ई गाँओ रौतहट जिल्लामे रहे । सर्लाहीके सदरमुकाम मलंगवा से ३० किलोमिटर पश्चिम-दक्षिण आ रौतहट गौरसे करिव ७ किलोमिटर पूरब बागमती नदी किनारपर बलरा लक्ष्मीपुर भारतके सिमासे जोडल एतिहासिक गाँओ हए । गाँओके पुरब-दक्षिणमे भारतके सिमा हए । बलरा लक्ष्मीपुर गाँओसे पश्चिम ३ किलोमिटर दूरीपर बागमती नदी सर्लाही रौतहट जिल्ला छुट्टिअएले हए । बागमतीके वाढसे सतायल गाँओ हए बलरा लक्ष्मीपुर । अभी भी ईहाके नागरीकके बजार भारत विहारके सीतामढी जिल्लाके बसविट्टा हए । स्वास्थ शिक्षा आ आत्म निर्भरके लेल अभी भी स्थानिय लोग सीमापर भारत पर निर्भर हए । पहिले नेपालके सिमा क्षेत्रके गाँओमे स्कुल कलेज नरहे । सब विधार्थी पढ़ेके लेल भारत जाए ।सदरमुकाम आ जिल्लाके मुख्य बजारसे दुर रहल ई गाँओके सम्बन्ध देशके विभिन्न जगहसे ओतेने महत्वपूर्ण हए । काठमाडौंसे सम्बन्ध बहुत पुराना तथा मजबुत रहल हए । ई गाँओमे प्रत्येक घरमे सरकारी नौकरी करेबाला लोग भेटत, साचे गैर सरकारी सेवा आ व्यवसायमे भी बहुत लोग संलग्न हए । लेकिन फिर भी रोजगारीके सम्बन्ध अपना देशसे बेसी रहल हए । पूरा बलरा नगरपालिकामे नेपालके राजनीति सरकारी सेवा आ समाजके प्रतिस्ठित पेसामे व्यवसायमे लागलके संख्या बहुत हए । जोन ईहाके विशेषता हए । सर्लाही जिल्लाके बलराके पहिचान शिक्षित आ उपर निकायमे पुगल नगरपालिकाके रुपमे जानल जाईअ । नेपालके मधेश प्रदेशके बलरामे २ सय १० वर्ष पहिले बस्ती रहल से प्रमाणित इतिहास हए ।
वि.सं. १८७२ साल (सन् १८१६) मे मेल सुगौली सन्धि अगाडिके गांओ बलरा लक्ष्मीपुरके इतिहास हए जेकर प्रमाण देखल गेल हए । राजा रणबहादुर शाहके समयमे पण्डित ज्योतिष दामोदर मिश्रके ७५ बिगहा विर्ता देलगेल रहे जेकर प्रमाणके रूपमे ताम्रपत्र आ ओइमे लिखल तथ्यसे पण्डित दामोदर मिश्रके घर रहलके आसपास में जग्गा कुशवितांके रुपमे देलगेल रहे । लेकिन विर्ता पावेसे अगाडिसे हिं उनकर वसोवास रहल प्रमाणित भेल हए । १८६२ सालमे कएल संकल्प २०१ वर्षके बाद १८८२ सालमे राजा रणबहादुर शाहके पोता राजेन्द्र विक्रम शाह राजा भेल समयमे कुशवितां के 'ताम्रपत्र' प्रदान कएल रहल उ ताम्रपत्र पुरातत्व विभाग प्रमाणित कएले रहल जेकर भाषा ऐहन हए । जे सारांशमे उल्लेख कएल गेल हए । "वि.सं. १८८२ वैशाख वदि १ मा भएका कुशविर्ता विषयको ताम्रपत्र चतुग्रह शान्तिको कामना गरी राजा राजेन्द्र विक्रम शाहवाट चार किल्ला सहितको मधेश रौतहटका ७५ बिगहा जमिन ज्योतिष मिश्र लाई कुशवितों स्वरुप दान दिएको लालमोहर ताम्रपत्र । आफ्नो खातिरमा संग सन्तान दर सन्तान सम्म भोग गर्न भनी संकल्प गरिदिएको व्यहोरा यसमा छ ।" ताम्रपत्रमे जमिन देवेके संकल्प १८६२ सालमे भेल बात उल्लेख कएल गेल हए। पुरातत्व विभागके अधिकृत आ लिपि विशेषज्ञ श्याम सुन्दर राजवंशी बिर्ता देल संकल्प २० वर्ष के बाद ताम्रपत्र बनल बतएले रहे । २०० वर्ष अगाडीके एतिहसिक गाँओ रहल ताम्रपत्र प्रमाणित कएले हए । इतिहासके अनुसार राजा रणबहादुर शाह विधवा ब्राम्हणी कान्तिदेवीसे विआह कएले रहे ।  विआहके पूर्व वचन देल अनुसार कान्तिदेवीके गर्भसे जन्मलेले गिर्वाणयुद्ध विक्रम शाह राजा भेल आ कान्तिदेवीके एकाएक क्षयरोग लाग गेल । राजा रणबहादुर शाहके बहुत मन पराए बाला रानीके लेल आ रानीके उपचारके लेल बहुत धामी झाक्री आ वैध लगएलन, पूजापाठ आ बहुत खर्च भेल ब्राम्हण सबके दान दक्षिणा मिलल रहे । वहि क्रममे पण्डित दामोदर मिश्रके भी दान स्वरुप ७५ बिगहाके बिर्ता मिलल बात पुरात्त्व अधिकृत राजवंशी बतएले रहे । ओकरा बाद १८६२ में रणबहादुर शाह राज्य खर्च चलावेके लेल विर्ता फिर्ता लेवेके अभियान भी चलएले रहे । ओई अभियानके इतिहासमे वास‌ठीकरण कहइया । वही समय १८६२ में पण्डित दामोदर मिश्रके विर्ताके विषयमे संकल्प कैल २० वर्षके बाद ताम्रपत्र देल गेल रहे जे अभी बलरा-३ में रहल लक्ष्मीपुर टोला बही ७५ बिगहामे रहल हए । संकल्प आ ताम्रपत्र देवेके समयमे प्रधानमे जे जनरल भिमसेन थापा रहत । ताम्रपत्रमे राजा राजेन्द्र विक्रम शाह आ थापाके नाम भी उल्लेख हए । ताम्रपत्रमे विर्ता देल जमिन प्रस्टसे तहिआके अंग्रेजी सिमाना (अभीके भारत। रुसलपुरके उत्तरके जमिन उल्लेख कएल गेल हए । ओइसे शताब्दीऔं पुराना ऐतिहासिक नगरी बलरा लक्ष्मीपुर हए से प्रमाणित भेल हए । ताम्रपत्र अभी भी सुरक्षित प्रमाणके रुपमे हए। ओकरा पुरात्व विभागसे पुर्न लेखन प्रमाणित कएले हए। विर्ता पाबेबाला पण्डित दामोदर मिश्रके पहिचान सुब्बा दामोदर मिश्रके रुपमे भी हए । सुब्बा दामोदर मिश्र कुमारी चोक तहसिल कार्यालय (ओई समयके कर संकलन करेबाला आ राज्यके हिसाब किताब राखेवाला) सुब्बा रहलन । अईसे बलरा लक्ष्मीपुर के इतिहास शाताब्दीऔं पुरान रहल प्रमाणित भेल हए । ऐतिहासिक आ पौराणिक काल खण्ड मिथिला, विदेह, तिरहुत, कपिलवस्तु सिम्रौनगढ़, विराटक्षेत्रके जगह सबके जइसे बलरा लक्ष्मीपुरके अपन इंतिहास रहल हए ।

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