सती बेहुला( बज्जिका लेख)
मुकेश मिश्र(साहित्यकार)
मलंगवा-८,सर्लाही
सती बेहुलाधाम मधेश प्रदेश, नेपालके सर्लाही जिल्ला पर्सा गाउँपालिका संग्रामपुरमे परईअ । "सती बेहुला" जेकर बज्जिका, मैथली, भोजपुरी आ संस्कृतमे बेहुलाके कथा आईओ जीवित हए। गाओ गांओमे बेहुला गीत गावल जाईअ खास करके विवाहके समयमे बेहुला पर बनल गितके माध्यमसे बेहुलाके साहस आ प्रेमके आर्दश रुपमे देखाएल जाइन। सबके प्रेरणाके श्रोत है बेहुला । सति बेहुला खालि एक कथा न हए ई नारी शक्ति प्रेम आ आस्थाके जीवित प्रमाण भि हए। संग्रामपुरके सतीधाम हम सबके सांस्कृतिक, लोकज्ञान आ परम्परा के प्रतिनिधित्व करइज। सति बेहुलाके कथा आईके सामाजकेलेल एगो प्रेरणा हए कि नारी केबल सहनशील नहोके बल्की बदलावके शक्ति भि हए। संग्रामपुरके सति बेहुलाधाम ओही कचाके जीवित स्मारक हए जे हमरा सबके लोक इंतिहास (मानस) में अमर कथा हए। ई सति बेहुलाधामके धार्मिक रुपसे महत्व भि हए। ई धाम हजारों सालसे लोक आस्था नारी समर्पण आ सच्चा प्रेमके गथाके रुपमे भि सजीव उदाहरण बनल हए। हर साल सावन महिनामे विशेष पुजा मेला आ भजन किर्तन होईअ। खास करके समाजके नारी बहुत श्रद्धासे अपन पतिके बायूके लेल पूजा अर्चना करईन। लोगके मान्यता हए कि सति बेहुलाके पूजासे घरमे सुख शान्ति आ पति के दिर्घायु मिलईअ ई धाममे 'सती स्थान" नामसे पूजा स्थल भी हए जहाँ बद्धासे लोग माथा टेकईअ ।
सति बेहुला कथा नेपाल भारत संस्कति आ इतिहासके सम्बन्ध भि राखले हए। ई दुनु देशके साझा लोक कथाके रुपमे भि सति बेहुला लोक प्रिय हए, अईसे नेपाल भारतके सिमा छुट्याएल है लेकिन भावना एक हए से भि प्रमाणित करईअ दुनु देशके संस्कृति विरासत जोडेवाला पुल हए सति बेहुलाके कथा नेपाल-भारतके साझापन, ऐक्यबद्धता आ सांस्कृतिक एकताके प्रतिक हए।
-सति बेहुला ईतिहास
प्राचिन समयमे मधेश प्रदेश, नेपाल सर्लाही जिल्लाके संग्रामपुर ओई समयमे उज्जयनगर देश रहे जहांके राजा बेचु साह रहलन। राजा येचु के बेटी रहे बेहुला जिनका सतित्व प्राप्त रहे। राजकुमारी बेहुला सुन्दर सुशिल, कर्मठ भगवान शिवके भक्त रहे। राजकुमारी बेहुलाके स्नान करेला विशेष ६ प्रकारके पोखरी आ घाटके निर्माण राजा करैले रहे राजदरबारसे लेके पोखरी तक गोप्य सुरंग मार्ग (गुफाके रास्ता) रहे ओई गुफाके रास्ताके करिब २ किलोमिटर लम्बाई रहे जे पोखरी होईत शिव मन्दिरमे जाके खुले। ओही गुफाके रास्ते राजकुमारी बेहुला ६ घाट पोखरीमे स्नान करके फेर राजदरबार आ जाए जेकर प्रमाण आईके दिन में भि हए।
राजकुमारी बेहुलाके काजल धोएल बनाएल काजर धोई जा सिन्दुर धीएके लेल बनाएल सिन्दुर धोई पोखरी अभितक देखेला मिलत बाँकी पोखरी बाइसे नजिक रहल हल्दी नदीमे मिलगेल ईहां के लोग कहैत्र। राजकुमारीके विवाहके समयमे वारातीके लेल आवश्यक वेल धोएवाला बेलधोई पोखरी, चाउर धीएकेलेल चउरधोईन पोखरी, गोर धोएबाला गोरधोई पोखरीके मि अस्तित्व अभि हए। बराति बइठके आएल हात्ती बान्हेलेल बनाएल हातिसार आ पानी पिएलेल बनाएल पोखरी हए। इहकि मन्दिरके नाममे रहल हुए।
ईहाके मन्दिर आसपास १२ गो पोखरी हए। एक समय नेपाली तिथि अनुसार पुरातात्विक विभाग वि.स. २०४७ आ २०५५ सालमे उत्खन्नन केलापर बहुत एतिहासिक मुर्ति भेटल रहे उ काठमाण्डौ अनुसन्धानके लेल लेगेल ।
-सॉपके खानी (दरबार आसपास)
सति बेहुला मन्दिर आ दरबारके आसपास खेत जोतलासे बुहत बेर रत्नके गहना आ सामान भेटईत आ रहल हए। पुरान-पुरान बरका ईटाके टुक्रा देवाल बनावेलेल प्रयोग भेट पत्थर पुरान मुर्तिके टुक्रा भि समय-समयमे मिलईत आरहल है ओईमेसे कुछ संकलन करके राखल है त कुछ संकलन न भै सकल हए। सति बेहुला दुल्हीनके कथा नागसे जुडल भेलाके कारण कोनो ईहां आसपासमे सांप न मारईज बल्की सांप देखलापर नाग देवता कहईत दुध आ लावा चढ़ाके पुजा करईन। जे सांप मारईत्र ओकरा आर्थिक आ भौतिक क्षति भेलह। मन्दिर दरबार आसपास आ संग्रामपुरमे सॉपके वासस्थल हए। सव सांपके पुजा करईअ। सति बेहुला मन्दिर आसपास नाग देखाईत रहल जब तक खेत खलिहानमे रत्न भेटईत रहल। अभि भि घरके जग, इनार, पोखरी भग्नावशेषसे पहिलेके उज्जयनगर राज्यके राजदरवार आ एतिहासिक स्थानके महत्व देखाईदेइअ । ईहा पुरान बर्तन बाल, पुरान मिट्टीके बर्तन, पैला भोजन बनावेबाला आवश्यक बर्तनसब भेटईत आएल हुए।
-सतित्व प्राप्त बेहुला विवाह
इतिहासके अनुसार उज्जयनगरकेराजा बेचु शाहके बेटी राजकुमारी बेहुला तपस्या करके शक्ति प्राप्त कएले रहे। जोन ऋषि सबके तपस्यासे शक्ति प्राप्त कएले रहे उहे ऋषि सब भविष्यवाणि कएले रहे कि राजकुमारी बेहुलाके विवाह होएत त ओकर पति (दुल्हा) के नाग (कोहबर घरमे। डसलेत आ मरजाएत ई सुनके पतिके बचावेकेलेल विवाहसे पहिले तपस्या करके पतिके बचावेके बरदान भगवान शिवसे लेले रहे।
राजकुमारी बेहुला जय यौवन अवस्थामे भेल उनकर सुविधा मि विस्तार होईतगेल राजकुमारी अकेले खेलकुद करेला नचाहे उनकर सहेली सवभि बुहत रहे उनका सुरक्षाके लेल राजा वेचु साह पोखरीके ६ घाट विशेष प्रकारके निर्माण कररैले रहे जोनमे स्नान पुजा करेकेलेल शिव मन्दिर आ राजदरबार तक सुरक्षित रास्ता गुफा बाला बनवैले रहे ओहि रास्तासे राजकुमारी बेहुला स्नान पुजा पाठ करके फेर दरवारमे आवे। उ रास्ताके प्रयोग केवल राजकुमारी बेहुला मात्र प्रयोग करसके औरो केकरो अनुर्मात नरहे।
जब राजकुमारी बेहुलाके विवाह करेके उमेर भेल चारो तरफ सब दिशामे राजकुमारके खोजी शुरु होगेल । तपस्यासे शक्ति पाएन बेटीके लेल लायक राजकुमार खोजेलेल राजा बेचु साहके बहुत समस्या परल। दुल्हा खोजेके कममे भारत चम्पापुरके राजा चुनु साहके बेटा राजकुमार बाल लखिन्द्र भेटल जे राजा चुनु साहके बाल नखिन्द्र आठवा बेटारहे । राजकुमार बाला लखिन्द्रके सात भाईके फुपु मनसा देवी मारदेले रहे। मनसा देवी राजा चुनुसे पुजा मांग कएले रहे मगर पुजा नदेलाके चलते सात भाईके मारवेले रहे। पुजा देलाके बाद वाला लखिन्द्रके मनसा देवी जीवित छोडदेलक भगवान शिवके बेटी मनसा देवी कैलाशसे निकालदेलाके बाद मुत्यु लोकमे आके राजा चुनु साह से भाई बहिनके नाता बनाके रहैत रहे।
ओकराबाद मनसा देवी राजा चुनुके हमरा पुजा करेके लेल दबाब देवे लागल पुजा नकएलाके बाद उनकर बेटा सबके मारेके शुरू करदेलक लेकिन जब आठवां बेटा जन्मलेलक तव चुनु कहलक कि विवाह भेलाके बाद पुजा देवे से बचन देलक ओईके कारण मनसा देवी बाला लखिन्द्र के जीवित छोडले रहल मनसा स्वयं नागदेवी रहे। राजा बेचुके शक्ति प्राप्त बेटीलेल राजकुमारके आवश्यकता रहे। आ राजा चुनु साह राजकुमार बाल लखिन्द्रके मारलाके बाद भि जीवित करेबाला शक्ति प्राप्त राजकुमारी दुल्ही आवश्यक रहे। ई सब देखके दुनु राजा जोडि मिलाके उज्जयनगरके राजकुमारी बेहुलाके विवाह भारत चम्पापुरके राजकुमारके साथ करेके सहमति कैलक ।
विवाहके बात चललाके बाद मनसा देवी राजा चुनुसे पुजा मांग करे लागल लेकिन राजा चुनु साह घमण्डी स्वभावके पुजा देवेसे इन्कार करदेलन ओकरावाद राजकुमार लखिन्द्र आ राजकुमारी बेहुलाके विवाह सम्पन्न भेल। विवाह सम्पन्न भेलाके बाद ओहिदिन कोहबरमे सुहागरात मनाबेके समय से पहिले मनसा देवी राजकुमार लखिन्द्रके नाग रुपलेके इस लेलक लेकिन शक्ति प्राप्त राजकुमारी बेहुला अपन मरल पतिके पुनः जीवित बनएले रहे।
बेहुला अपन पतिके भगवानके आराधनासे बचावेमे सफल भेल। ई संग्रामपुरके "सति बेहुलाधाम" नारी शक्तिके रुपये पुजा होइज। नेपाल भारतके परम्परा आ सांस्कृति विरासत आई भि अई स्थानके जिवित हए। सति बेहुलाके अमर कहानी नेपाल भारत, बंगलादेशतक प्रचलित हुए श्रावणमे नागके पूजा नागपंचमिके रुपमे मनावेके चलन भि सति बेहुला आ नागदेवी । मनसा जे जुडल हए। सति बेहुला अपन पति लगायत अपन पतिके भाई सबके जीवित करावेमे सफल भेल रहे। मानव लोकसे इन्द्रलोक (देवलोक तक। के संघर्षके बारेमे दर्जनो किताब सति बेहुलाके प्रकाशित हए मगर सति बेहुलाके बाबु बेचु साहके दरबारके अस्तित्व त हए लेकिन विकासके अभाव हुए प्रचार प्रसारके व्यापक आवश्यकता हए। बहुत नाटक किताब भि छपाएल हए सब अपन-अपन हिसावसे साहित्यकार सब लिखले हए। वास्तवकि इंतिहासके अभि भि अनुसन्धान करनाई बहुत जरुरी हए। जनकपुर राजाके जनकजी के दरबारसे नजिक रहल सति बेहुला स्थान कहि न कहि पौराणिक ईतिहाससे बहुत ज्यादा सम्बन्ध रखले साबित करइञ । राजा जनकजीके दरबार जे जनकपुर नेपालमे हए आ जनकीजीके जन्म स्थान भारत सीतामढ़ीमे हए महिना बेहुलाके भि नैहर नेपालके संग्रामपुरमे हए। आई समयके उज्जयनगर (लक्ष्मीपुर) आ ससुरा भारतके चम्पारणमे हए। सीतामढ़ी आ जनकपुरसे नजदिक सति बेहुलाधाम आ राजा बेचु साहके दरवारके अस्तित्व जीवित हए ।
पतिके मृत्युके बाद राजकुमारी बेहुलाके पतिके मृत शरिर एगो नाओ डेंगी। पर रखके नाओ (डेंगी) पर बैठके गंगा नदी यात्रा करके भगवान शिव आ मनसा देवीके आराधना करईत संकल्प कैलक कि जबतक हमर पति पुनः जिवित नहोएत तवतक यात्रा खतम नकरवई। तब मनसा देवी आ भगवान शिव स्वयं बेहुलाके पवित्र प्रेम धैर्य, निष्ठा आ संकल्प देखके प्रसन्न भेलन आ राजकुमार बाल लखिन्द्रके पुनः जिवित कैलन ।
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